Thought of Narendra Modi

नरेंद्र मोदी के विचार 


1. Main Desh Ki Janta Ko Aashvast Karna Chahata Hoon Ki Hamare Liye Har Ek Ko Saath Lekar Chalana Hamara Lakshya Hai, Chahe We Hamara Kitana Bhi Virodh Karen. -Shree Narendra Modi
Main Desh Ki Janta Ko Aashvast Karna Chahata Hoon Ki Hamare Liye Har Ek Ko
2. Jit Ki Unchai Jitani Bhi Ho, Sarkar Men Sabhi Ko saath Lekar Chalana Hamari Jimmedari Hai. - Pradhanmantri Narendra Modi
Jit Ki Unchai Jitani Bhi Ho, Sarkar Men Sabhi Ko saath Lekar Chalana Hamari
3. Agale 60 Mahino Ke Liye, Apko Ek Behatar Majdoor Milega- Pradhanmantri Narendra Modi
Agale 60 Mahino Ke Liye, Apko Ek Behatar Majdoor Milega
4. Aapne Mujhe Bharosha Jataya, Main Aapmen Bharosha Jatata Hoon. Jab Main Ek kadam Uthata Hoon to Main Vishvas Karta hoon Ki 125 Crore Log Mere Saath Chalenge. - Pradhan Mantri Narendra Modi
Aapne Mujhe Bharosha Jataya, Main Aapmen Bharosha Jatata Hoon.
5. Banarash Ke Logon Ne Mere Maun Par Apni Manjoori Ki Mohar Laga Di Hai. - Bharat Ke Pradhan Mantri Narendra Modi
Banarash Ke Logon Ne Mere Maun Par Apni Manjoori Ki Mohar Laga Di Hai

Narendra Modi Ke Vichar

नरेंद्र मोदी के अनमोल विचार 



Sabka Saath, Sabka Vikash -

1. Sabka Saath, Sabka Vikash - Pradhan Mantri Narendra Modi
Sarkar Kisi Ek Vishesh Parti Ki Nahi Hoti Balki Desh ke Sabhi Logon Ki Hoti Hai

2. Sarkar Kisi Ek Vishesh Parti Ki Nahi Hoti Balki Desh ke Sabhi Logon Ki Hoti Hai - (Bharat Ke Pradhan Mantri)
Ek Sarkar Ke Liye Koi Khas Nahi Hai Aur Na Hi Koi Paraya Hai

3. Ek Sarkar Ke Liye Koi Khas Nahi Hai Aur Na Hi Koi Paraya Hai - Pradhan Mantri Narendra Modi
Meri Jimmedari Desh Ko Chalane Men Sabhi Ko Saath Lekar Chalane Ki Hai

4. Meri Jimmedari Desh Ko Chalane Men Sabhi Ko Saath Lekar Chalane Ki Hai - Narendra Modi
Ek Loktantra Men Koi Dushman Nahi Hota Balki Kewal Pratispardha Hota Hai.

5. Ek Loktantra Men Koi Dushman Nahi Hota Balki Kewal Pratispardha Hota Hai. Yah Pratispradha Chunavon Ke Saath Samapt Ho Jati Hai. - Bharat Ke Pradhanmantri Narendra Modi

Asaty par saty ki jit- Diwali- Anmol Vachan Aur suvichar

असत्य पर सत्य की जीत - दिवाली
आज हम आपको यह बताते हैं कि दिवाली क्यो मनाई जाती है। इस दिन भगवान राम बनवास काटकर और असत्य पर विजय प्राप्त करके अथार्त बुराइयों को खत्म करे अयोध्या अपनी नगरी में वापस लोटे थे। भगवान  राम के स्वागत में इस दिन अयोध्यावासियों ने घी के दीप जलाये थे और चरों ओर प्रकाश की रोशनी की थी तभी से ये त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है। इस त्योहार को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है। यह त्योहार हमें यह सीख देता है कि हमें अंधेरे को दूर करके प्रकाश को सब जगह फैलाना चाहिए। अथार्थ हमें अपने जिंदगी में ऐसा काम करना चाहिए जिससे ज्ञान का प्रकाश हमारे अंदर समाये और हम इससे आपना और दूसरों का भी भला कर सकें।  हमें इस त्योहार से यह भी ज्ञान मिलता है कि सत्य की हमेशा ही जीत होती है बस जरूरत है कि हम उस पर विश्वास रखें।
दिवाली सुविचार (दीपावली के अनमोल वचन)
असत्य पर सत्य की जीत - दिवाली
1. लक्ष्मी जी आपके द्वार पा आई है, दर पर तुम्हारे नई खुशियां लाई हैं, दिवाली आई है, दिवाली आई है।
इस त्योहार को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है।
 2. ये दीप नहीं दीपावली के, ये दीप है उस रोशनी के, जो हमारे दिलों में प्रेम और विश्वास के जलाये बैठे हैं।
हमें अंधेरे को दूर करके प्रकाश को सब जगह फैलाना चाहिए।
3. आई आई दिवाली आई, साथ में कितनी खुशियां लाई, धूम मचाओ, मौज मनाओ, आप सभी को दिवाली की बधाई! Happy Diwali Friends!
सत्य की हमेशा ही जीत होती है बस जरूरत है
4.  पल पल सुनहरे फूल खिले, कभी ना हो कांटो को समा,
जिंदगी आपकी खुशियों से भरी रहें, दीपवाली पर हमारी यही शुभकामनाएं!
Deep Hi Jyoti Ka Pratham Tirth Hai
5. Deep Hi Jyoti Ka Pratham Tirth Hai,
Kayam Rahe Iska Arth Varna Vyarth Hai. 
Jhilmil Roshani Men Nivedit Aviral Shubhkamnaye
6.  Jhilmil Roshani Men Nivedit Aviral Shubhkamnaye,
Astha Ke Aalok Men Aadaryukt Mangal Bhavana!

Suvichar-Anmol-Vachan

 सुविचार 

(अनमोल वचन)


ऐसे बहुत से सुविचार होते हैं जो दिल और दिमाग को शांति और खुशी का अहसास देते हैं। वैसे तो ये बहुत छोटे छोटे वाक्य में होते है लेकिन इनके अर्थ बहुत ज्ञानवर्दक होते हैं। इसके रस और सार को अनके व्यक्ति दिमाग और सोचने की क्षमता के अनुसार तथा नजरिए से अलग-अलग लगाते हैं उनको एक ही भाव समझ में आता है वह यह कि सविचार दिल और दिमाग को शांति और खुशी प्रदार करके हमारे ज्ञान को बढ़ाता है। बहुत से ऐसे भी सुविचार होते हैं जिनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है इन्हें अपने जिंदगी में अपनाना चाहिए।
सविचार (अनमोल वचन) को पढ़ने से हमें वह संदेश प्राप्त हो जाता है, जो किसी भी मोटे किताब से भी नहीं प्राप्त होता। यदि आप यह देखना चाहते हैं कि अनमोल वचन अथार्त सुविचार का हमारी जिंदगी पर क्या प्रभाव होता है, तो इसे अपने के आस पास किसी दीवार पर लिख दें, इसे रोज देखें। इससे आपको कुछ ही दिनों में महसूस होने लगेगा कि जिंदगी में कुछ अच्छा बदलाव आने लगा है।

कुछ अनमोल विचार के लिंक:-

1. धर्म कोई भी हो हमें सभी धर्म का सम्मान करना चाहिए क्योंकि ईश्वर कभी भी किसी को हिंदू, मुस्लमान, सिख और ईसाइ बनाकर नहीं भेजता है।
2. ईश्वर को सभी धर्मों में अलग अलग नामों से पुकारा जाता है लेकिन मेरे सोच के अनुसार वह अनेक होते हुए भी एक है इसलिए हमें कभी भी आपस में बैर नही रखना चाहिए सभी के धर्मों का सम्मान करना चाहिए।
3. कोई कहता है कि में हिंदू हूं और कोई कहता है कि में मुस्लमान हूं, कोई कहता है कि में सिख हूं और कोई कहता है कि में ईसाई हूं लेकिन मैं गर्व से कहता हूं कि मैं एक हिंदूस्तानी हूं क्योंकि चाहें कोई किसी भी धर्म का क्यों न हो यदि वह भारत में पैदा हुआ है तो उसका जन्म स्थल भारत का ही कहलायेगा तो हुआ न कि हम हिंदूस्तानी हैं।
4. कहते है कि ईश्वर एक है लेकिन रूप अनेक हैं वह कहीं राम तो कहीं कृष्ण, कहीं भगवान शिव कही विष्णु के रूप में दिखाई देते हैं। हम इन्हे क्यों पूजते हैं? इसका उत्तर एक ही मिलेगा कि वे इस संसार में प्रेम और सिर्फ प्रेम तथा जनकल्याण के लिए काम किएं है इललिए वे आप पूजे जाते हैं।
5. जिस प्रकार से प्रेम एक इसके रूप अनेक होते हैं ठीक उसी प्रकार से ईश्वर एक इसके रूप अनेक होते हैं। क्योंकि आपने देखा होगा कि एक मां आपने बच्चों से कैसे प्यार करती है और एक प्रेमी आपने प्रेमिका से तथा एक भाई अपने बहन से और एक बाप अपने बच्चों से तथा एक शिक्षक छात्र से, सब का प्यार देखने में अलग होता है लेकिन है तो वह प्यार ही।
ऋग्वेद के अनुसार ईश्वर एक है लेकिन दृष्टिभेद से मनुष्यों ने उसे भिन्न-भिन्न रूपों में देखा है। जिस प्रकार एक व्यक्ति दृष्टिभेद के कारण परिवार में अपने लोगों द्वारा पिता, चाचा, भाई, फूफा, मामा, दादा, भतीजा, बहनोई, पुत्र, पोता, भांजा, नाती आदि नामों से संबोधित होता है, उसी प्रकार से ईश्वर भी अनेक रूपों में देखा तथा जाना जाता है।
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Maha Shiv Ratri ki hardik shubhkamane and happy 2014 maha shviratri

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
महाशिवरात्रि का महत्व
इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था

ऐसी कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। इस वजह से ही यह त्योहार मनाया जाता है। सभी शिव भक्त कांवरियों तथा धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों में महाशिवरात्रि का महत्व बहुत अधिक माना जाता है। धर्म मतानुसार इस दिन भगवान शिव का अंश हरेक शिवलिंग में मौजूद रहता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव की पूजा ईश्वर के रूप में न करके गुरू के रूप में किया जाता है। भगवान शिव ही इस संसार के पहले गुरू माने जाते हैं। इस दिन पूजा करते समय भगवान शिव के साथ देवी पार्वती और गणेश जी की भी पूजा करें। बिल्वपत्र एवं अक्षत को अपने हाथ में लेकर भगवान शिव का ध्यान करें। पूजा के लिए सभी प्रकार की समाग्री जो पंडत जी बताते हैं उसे लेकर विधि पूर्वक करें।
शिव के मंत्र का जाप करें जो इस प्रकार है-
Dev-Dev Maha Dev Nilkanth Namovastu Te.
Kartumichchhmyan Dev Shivratrivartan Tab.
Tab Prasadad Devesh Nirvighan Bhavediti.
Kamadayaroo Shatravo Maa Vai Pidankuravantu Naib Hi.
धर्म मतानुसार इस दिन भगवान शिव का अंश हरेक शिवलिंग में मौजूद रहता है।

भगवान शिव की पूजा ईश्वर के रूप में न करके गुरू के रूप में किया जाता है

भगवान शिव ही इस संसार के पहले गुरू माने जाते हैं।

इस दिन पूजा करते समय भगवान शिव के साथ देवी पार्वती और गणेश जी की भी पूजा करें।

Kamadayaroo Shatravo Maa Vai Pidankuravantu Naib Hi.

Tab Prasadad Devesh Nirvighan Bhavediti.

Kartumichchhmyan Dev Shivratrivartan Tab.

Dev-Dev Maha Dev Nilkanth Namovastu Te.

Somvar Vart ki katha

Is katha ke anusar jab Sanat Kumaron ne Maha Dev se Unhe Sawan Mahina Priy Hone ka Karan Poochha
Is katha ke anusar jab Sanat Kumaron ne Maha Dev se Unhe Sawan Mahina Priy Hone ka Karan Poochha To Mahadev Bhagwan Shiv ne Bataya ki Jab Devi Sati Ne Apne Pita Daksh ke Ghar Meh Yog-Shakti se Sharir Tyag kiya tha, Usase pahale devi sati ne Mahadev ko har janm men pati ke roop men pane ka pran kiya tha. Apne doosare janm men devi sati ne parvati ke naam se himachal aur rani maina ke ghar men putri ke roop men janm liya. Parvati ne sawan ke mahine men nirahar rah kar kathor vart kiya aur unhe prasann kar vivah kiya, jisake bad hi mahadev ke liye yah vishesh ho gaya. Yahi karan hai ki sawan ke mahine men suyogy var ki prapti ke liye kunwari ladaliyan vart rakhati hai.
Is vart men Bhagwav shankar ke sath mata parvati aur shri ganesh ki bhi pooja ki jati hai.
Is vart men Bhagwav shankar ke sath mata parvati aur shri ganesh ki bhi pooja ki jati hai. Varti yatha shakti panchopachar tatha poojan samagri ke sath pooja karti hai.
Shastro aur purano men sawan somvar vart ko ati phaldai kaha gaya hai.
Shastro aur purano men sawan somvar vart ko ati phaldai kaha gaya hai. Is vart ko jab vivahit striyan karti hai to parivar men khushiyan, smridhi aur samman prapt hotah hai. Purusho ko is vart se kary vyavasy men unnati, Shaikshnik gatividhiyon men saphalata aur arthik roop se majbooti milati hai.

Bhagwan Shiv ks poojan ke mahina-Savan Mah

भगवान शिव के पूजन का महीना-सावन माह
कहते हैं कि सावन का महिना भगवान शिव के पूजा करने का महीना होता है लेकिन इस महीने में सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है और हमारे सभी कष्ठों का धीरे धीरे निवारण होता है।
 सावन का महिना भगवान शिव के पूजा करने का महीना होता है लेकिन इस महीने में सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है

हिंदु धर्म के अनुसार सोमवार के व्रत तीन प्रकार के होते हैं-
1. सावन सोमवार
2. सोलह सोमवार
3. सोम प्रदोष
सोमवार व्रत और उसके करने के क्या विधि-
सोमवार के व्रत भी लगभग सभी व्रतो के समान ही है। इस व्रत को श्रावण माह से शुरू किया जाता है और इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। इस व्रत को सूर्योदय से आरंभ करके तीसरे पहर तक करा जाता है। इस व्रत में भगवान शिव और पार्वती देवी की पूजा करने के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी जरूरी है।
पूजन करने के लिए जरूरी बातें-
1. सावन सोमवार व्रत में ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठना चाहिए।
2. पूरे घर की सफाई करनी चाहिए।
3. सुबह के समच में स्नान करना चाहिए।
4. पुरे घर में गंगा जन का छिड़काव करना चाहिए।
इस पूजन को करने के बाद भगवान शिव के इस मंत्र का संकल्प करें-
Mam Kshem-Sthairy-Vijaya-Rogyai-Shavrya-Bhivridhay-Arth Somvar Vrat Karishye
5. इसके बाद इस मंत्र पर ध्यान करें-
Dhyaye-Nnityam-Hesh Rajat-Giri-Nimbh Charoo-Chandra-Vatasam Ratna-Kalpo-Jabalang Parashu-Mirgvara-Bhitihastam Prasannam.
Padhdhasin Samatatstutumam-Mamar-Ganai-Vyargh-Kriti Vasanam Vishvdhyam Vishvdhyam Nikhil-Bhay-Harm Panchav-Katram Trinetram.
6. ध्यान करने के बाद 'ॐ नमः शिवाय' (Om Namah Shivay) के मंत्र के जाप करके पूजन करें।
7. इसके बाद भगवान शिव के सावन सोमवार व्रत का कथा सुनें।
8. कथा सुनने के बाव भगवान शिद की आरती करें और फिर प्रसाद को बांटे।
9. तत्पश्चात फलाहार या भोजन करें।
सोमवार के व्रत भी लगभग सभी व्रतो के समान ही है। इस व्रत को श्रावण माह से शुरू किया जाता है


सोमवार व्रत करने के लाभ
1. इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती अनुकंपा सदा आप पर बनी रहेगी।
2. आपके सारे कष्ट भी धीरे धीरे दूर हो जायेंगे।
3. आपका मन भी शुद्ध हो जायेगा जिसके फलस्वरूप आपका काम अच्छा होगा और जीवन धन धान्य हो जाचेगा।
4. भगवान शिव पर भरोसा करें क्योंकि शिव अपने भक्ते के कष्ठों का हरण करते हैं।
 आपका मन भी शुद्ध हो जायेगा जिसके फलस्वरूप आपका काम अच्छा होगा और जीवन धन धान्य हो जाचेगा।

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