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25 जन॰ 2021

Inspiring Short Stories on Positive Attitude in Hindi - प्रेरणादायक और सकारात्मक कहानी

Positive and Inspirational thoughts

एक प्रेरणादायक  और सकारात्मक कहानी


एक बार एक शहर में किसी भले व्यक्ति की मृत्यु हो गयी। लोग अर्थी को Shamshan Ghat ले जाने के लिए तैयार हुए तभी एक आदमी वहां पर आ गया और अर्थी के पांव (feet of died body)को पकड़कर बोला कि मरने वाले व्यक्ति से मुझे अपने 15 Lakh रूपये लेने हैं, इसने मेरे से एक बार उधार लिया था। पहले आप लोग मेरे पैसे ( 15 Lac)दिला दीजिए तब मैं उसको आगे ले जाने दूंगा। 


positive thoughts in hindi
ऐसा देखकर तमाम लोग जो अर्थी के अंतिम संसकार (Antim Sanskar) में शामिल होने आये थे, भोचके होकर तमाशा देखने लगे। मरने वाले व्यक्ति के एक बेटा ने कहा कि पिताजी ने हमें कोई ऐसी बात नहीं बताए कि उन्होने किसी से Karz लिया है। इसलिए हम आपके इस कर्ज को नहीं लोटा सकते, हो सकता है आप झूठ बोल रहे हो। इसके बाद मृतक के भाइयों ने भी यह कह दिया कि जब इसके जिम्मेदारी बेटे ने भी नहीं लिया तो हम क्यों दे। इस प्रकार की बाते जब घर की औरतों (Women of the house) को पता चली तो कफी बदनामी होने लगी। 

इसके बाद जब मरने वाले व्यक्ति के इकलौती बेटी को पता चली तो वह फोरन उस व्यक्ति के पास आई और बोली कि आपका कितना कर्ज है। मैं चुकादूंगी। फिर लेनदार ने कहा कि 15 lac । इसके बाद बेटी ने आपने सारे जेवर गहने और नकदी (Jewelry or cash) उसको दे दिये और कहा कि अभी मेरे पास केवल इतना ही है, कुछ ही दिनों मैं आपके कर्जे (Loans) चुका दूंगी। Please आप पिताजी की अंतिम संसकार (Antim Sanskar)  होने दीजिए। 

इतना सुनने के बाद अर्थी के पांव पकड़ने वाला मनुष्य खड़ा हुआ और बोला कि असल में बात यह है कि 15 लाख रुपये मुझे लेने नहीं बल्कि देने है। जब मुझे इनकी मरने की Khabar लगी तो मैं फोरन यहा आया और उनके किसी अपने जो सबसे नजदीक का रिस्तेदार हो उसको पता करने के लिए यह नाटक किया था। मुझे माफ कीजिए मैं इनके वारिस को जनना चाहता था इसलिए ऐसा किया। लो बेटी ये 15 लाख रुपये ये तुम्हारी अमानत है। 

सार - कुछ लोग भलाई भी इस प्रकार से करते हैं कि स्वयं को सोचने पर मजबूर होना पड़ता है। 



सकारात्मक सोचो, सकारात्मक बनो और सकारात्मक करों, इससे सफलता अवश्य मिलेगी।- VK Singh

अन्य प्रेरणादायक सुविचार

23 जन॰ 2019

Short Story Quotes: - एक स्त्री के लिए उसका सबसे किमती आभूषण क्या है?

एक स्त्री के लिए उसका सबसे किमती आभूषण क्या है?


कुछ दिन पहले मैं नौसेना के एक उत्सव में शामिल होने गया था। जब मैं वहाँ गया तो पता चला कि ये सिर्फ महिलाओं के सम्मान के आयोजित किया गया था। सभी नौ सैना में काम करने वाले कर्मचारियों की पत्नि वहाँ आई हुई थी।

एक स्त्री के लिए उसका सबसे किमती आभूषण क्या है?


मैंने वहां पर देखा कि आगे की पहली पंक्ति में जो तीन महिलाएं बैठी हुई है उनका बहुत खास ध्यान रखा जा रहा है। अगल बगल से पूछने पर पता चला कि उनमें से दो तो सबसे वरिष्ठ अधिकारियों की पत्नियां थी।

लेकिन जो चीज़ मुझे सबसे अज़ीब लगी वो ये कि वो दोनों महिलाओं का अन्य लोगों के प्रति रवैया बहुत बुरा था। वो खुद को जाने क्या समझ रही थी। सब पर हुकुम चला रही थी और बद्तमीजी से बात करना ही वे अपना शान समझ रही थी। 
मैं तो यही सोच रहा था कि आखिर इन महिलाओं के पास खुद का व्यक्तित्व ही क्या था। बस अधिकारी की पत्नी होना ही काफी है क्या?

वहीं दूसरी तरफ ये तीसरी महिला थी जो बहुत ही नम्र और शांत स्वभावी थी। सभी को आदर दे रही थी। आदेश वो भी दे रही थी कर्मचारियों को किन्तु भाषा सुशील थी। पूछने पर पता चला कि वो अध्यापक है यहाँ और इसलिए सबके सम्मान की अधिकारी भी।

तीसरी महिला की पहचान उसके पति से नहीं बल्कि उसकी अपनी थी। उसकी पहचान कराने के लिए वहाँ किसी को उसके पति का नाम नहीं लेना पड़ा।

एक महिला के लिए उसका सबसे किमती आभूषण है उसकी खुद की एक अलग पहचान।
आखिर कब तक हम किसी की बेटी, किसी की पत्नी और किसी की माँ का घण्टा गले मे डालकर घूमेंगे?
किसी भी महिला का आभूषण उसकी विद्या होने पर भी विनम्रता है, और विवेक है - क्या सही क्या गलत, कौन मित्र कौन शत्रु, क्या सत्य और क्या असत्य, क्या धर्म और क्या अधर्म। यह विवेक विद्या के बिना संभव नहीं। विद्या ही मनुष्यमात्र का सबसे किमती आभूषण है। यह बार इसी घटना से स्पस्ठ हो जाता है। विद्या से इन्सान को निर्णय लेना, आत्मनिर्भर बनना और आत्मविश्वास होना, यह सब स्वतः सिद्ध हो जाता है।

शिक्षा (Education):


  1. शिक्षा को कभी पैसे से नहीं तौला जा सकता, यह तो वह आभूषण है जो सबसे मूल्यवान है। 
  2. निपुणता एक प्रकार का मार्ग है, कोई गणतब्य स्थान नहीं, इस मार्ग पर चलना ही शिक्षा कहलाता है। 
  3. शिक्षण केवल यह बताता है कि क्या संभव है और क्या असंभव, लेकिन सीखना असंभव को संभव बना देता है। 

18 अग॰ 2018

Manushy Ka Svabhaav, Aaeena Se Kam Nahin

मनुष्य का स्वभाव, आईना से कम नहीं

किसी मनुष्य का उठना और बैठना या फिर उसका रहन-सहन या उसके बात करने का तरीका ,उसके बारे में सब कुछ बयान कर देता है। इसलिए कहा जाता है कि इन्सान का स्वभाव, आईना से कम नहीं कभी नहीं होता। 

मनुष्य चाहे कितना भी पढ़-लिख जाये या फिर कितना भी अमीर हो जाये लेकिन उसके बातचीत के स्वाभाव से उसके संस्कारों का पता लग ही जाता है। 

मनुष्य का स्वभाव, आईना से कम नहीं
इसलिए हमे अपने संस्कारों को कभी भी नहीं भुलना चाहिए। अपने संस्कार तथा स्वभाव पर ध्यान देना बहुत ही जरूरी है। कहते हैं न कि यदि बच्चों में अच्छे संस्कार और स्वभाव पैदा करना है तो उसके सामने हमें अपने अच्छे संस्कार तथा स्वभाव प्रस्तुत करते रहना चाहिए। किसी ने सही ही कहा है कि एक श्रेष्ठ बालक का निर्माण करना, सौ विद्यालयों का निर्माण करने से बेहतर होता है। 

आपने कई बार ऐसा देखा होगा कि कई व्यक्तियों कि आदतें उसके स्टेटस के बुल्कुल भी मेल नहीं खाता। 

इसी को ध्यान में रखते हुए मैं एक बहुत ही पुरानी कहानी प्रस्तुत करने जा रहा हूं। आशा करता हूं यह आपको बहुत ही पसंद आयेगी। 

बहुत पुराने समय की बात है, राजा के दरबार में एक अजनबी व्यक्ति नौकरी मांगने के लिए हाजिर हुआ। वहां पर उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई। इसके बाद उसने बताया कि मैं एक सियासी हूँ। इसके बाद राजा ने उसे घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज दे दिया और काम पर लगा दिया। कुछ दिनों बाद राजा ने उसे अपने सबसे अजीज घोड़े के बारे में पूछा तो उसने राजा को बताया कि घोड़ा नस्ली नहीं है। राजा को बहुत अदिख ताज्जुब हुई। उसने जंगल से घोड़े की जानकारी वाले को बुलाया। इसके बाद उसने बताय कि घोड़ा नस्ली नहीं है इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी और यह एक गाय का दूध पीकर उसके साध बड़ा हुआ है। फिर इसके बाद राजा ने उस सियासी को बुलाया और पूछा कि तुमको कैसे पता चला घोड़ा नस्ली नहीं है?

इसके बाद उने राजा को बताया कि यह गाय कि तरह सर को नीचे करके घास खाता है जबकि नस्ली घोड़ा घास को मुहं में रखकर सर को उपर उठा खाता है। इसके राजा बहुत खुश हुआ और उसे बहुत सारा इनाम दिया।   

इसके  साथ ही उसे रानी के महल में काम करने के लिए लगा दिया। कुछ दिने बाद राजा ने उससे रानी के बारे में राय मांगी तो उसे कहा कि तौर तरीके से रानी जैसे है लेकिन राजकुमारी नहीं। ऐसा सुनकर राजा के पैरों तले जमीन निकल गई और इसके बाद अपने सास को बुलाया और पूछताछ की तो पता चला कि उनकी बेटी जन्म लेने के 6 महीने बाद मर गई थी और इसके बाद उन्होने बच्चे को गोद लिया था जो आपकी रानी है। 

इसके बाद राजे ने सियासी से पूछा आपको कैसे पता चला ?

फिर सियासी ने कहा कि रानी का  आचरण नौकरों के साथ मूर्खों से भी बदतर है। एक खानदानी इन्सान का आचरण दूसरों के प्रति अच्छा होता है जो कि रानी में है नहीं। 

राजा एक बार फिर उससे बहुत खुश हुआ और बहुत से अनाज और भेड़ बकरिया उसके इनाम में दिया। कुछ दिन के बाद राजा ने सियासी को बुलाया और अपने बारे में पूछा तो उस पर सियासी ने कहा कि जान कि खैर हो तो मैं बताऊ। राजा ने वादा किया कि बताओ आपको कुछ नहीं होगा। फिर उसने राजा को कहा कि न तो आप राजा के पुत्र लगते हैं और न ही आपके अंदर राजा वाला गुण है। राजा को बहुत गुस्सा आया लेकिन उसने सियासी से वादा किया था इसलिए उसने उसे कुछ नहीं कहा। उसने अपनी मां को बुलाया पूछा। उसकी मां ने कहा कि हमारा औलाद नहीं था इसलिए हमने एक चरवाहे के बेटे को गोद लिया था जो कि तुम हो। फिर उसने सियासी से पूछा कि तुमको कैसे पता चाला तो उसने कहा कि राजा किसी को इनाम में हीरे मोती जवाहरात देता है न कि भेड़, बकरियां और खाने की चीज। इसलिए आपका चाल चलन चरवाहे के बेटे कि तरह है, किसी राजा की तरह नहीं। 

अतः इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किसी भी मनुष्य का आचरण उसके चरित्र को बता देता है। हमारी रहन-सहन और स्वभाव हमारे बारे में सब कुछ बताता है कि हम क्या है।

आपको मेरे यह आर्टिकल कैसा लगा, कमेंट करके बताये। यदि यह जानकारी आपको दूसरों के साथ शेयर करने लायक लगा हो तो इसे शेयर करें। 

धन्यवाद।।

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