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7 मई 2021

कोरोना एक महामारी है और महामारी को हराना है तो एक दूसरे के साथ देना जरूरी है

कोरोना एक महामारी है, सारे दुश्मनी भुलाकर एक दूसरे का साथ दें। तभी कोरोना को हरा पायेंगे वरना रावण रूपी कोरोना को हरा पाना मुश्किल काम है। अगर आप सरकार के भरोसे बैठे है तो यह गलत है। सरकार तो अपना काम करे या न करें। हमे अपना ख्याल रखाना तो हमारा कार्य है न कि सराकार का। 

Corona Ek Mahamari Hai

जब आप बीमार पड़ जाते है तो उसके बाद आप सराकार के सहारे से ईलाज करवाते हैं। उससे पहले तो आपको खुद का ख्याल रखना जारुरी है। आप जानते हैं कि हामरे देश की आबादी 135 करोड़ के आस पास है। कोरोना कितने को अचानक चपेट में लेने लगा। ऐसे में कोई भी सरकार हो फेल तो हो ही जायेगा ना।  इसलिए सरकार को कोसने से अच्छा हो कि आप लोग आपस में मिलकर रहे और एक दूसरे की सहायता करें। चलिए आपके एक कहानी से समझाते हैं- 

एक व्यक्ति को कोरोना हो गया। उसे उसका बेटा Doctor पास ले गया। Doctor ने मरीज की जांच की और उसके बेटे को स्पष्ट कह दिया कि जल्दी से Plasma donor का इंतेजाम कर लों नहीं तो कुछ भी हो सकता है। 


बेटे को अब तो कुछ भी नही समझ आ रहा था। पास में ही उसकी मां फफक-फफक कर रो रही थी। सामने बेड पर थे पिताजी बेहद ही सीरियस थे। बेटे ने सब जगह तो देख लिया था, सबसे गुहार कर ली थी लेकिन B positive plasma का कोई इंतजाम नहीं हुआ। देखा जाएं तो B positive plasma उनके घर पर ही था। कुछ महीने पहले उसके चाचा जी ने कोरोना को हराया था। बेट सोच रहा था कि चाचा से कहे तो कैसे कहे। चाचा जी से कुछ विवाद था। बेटा सोच रहा था कि चाचा जी को कहुंगा तो वे मना कर देंगे। इसके बाद वह माता जी को पिताजी के पास छोड़कर plasma के इंतेजाम के लिए शहर चला गया। दोपहर गुजर गी लेकिन कोई B Positive plasma का डोनर नहीं मिला। थक हार कर घर लौट गया।


घर पर आकर माता जी से चिपककर फूट-फूट कर रोने लगा। फिर बोला कि माताजी कोई डोनर नहीं मिला। पास में ही उसके चाचा जी बैठे थे। उन पर नजर पड़ी तो कुछ बोल नहीं पाया। चाचाजी खुद ही उसके पास आये और बोले कि तु कुछ नहीं बतायेगा तो क्या मुझे पता नहीं चलेगा। चाचा जी बेटे की आंसू को पोछते हुए बोले कि तेरा बाप मेरा भाई है। संकट और इस महामरी के समय में हमे एक दूसरे का साथ देना चाहिए। हमारा वाद विवाद जो हो उसकी जगह कहीं और पर है। भाई रहेगा तभी तो हम आपस में लड़ेगे और हस्सी मजाक करेंगे। जब भाई ही नहीं बचेगा तो मैं किस से लड़ाई करुंगा। अभी हमारा दुश्मन कोरोना है न कि भाई। पहले हमें कोरोना को हराना है। विवाद हम बाद में भी देख लेंगे। मैने Plasma दे दिया है। अब चुप हो जा। 


दोस्तों आशा करता हूं कि आपको इस कहानी के माध्यम से समझा पाया हुंगा कि अभी हमें मिलकर एक दूसरे का साथ देना है और कोरोना को हराना है। रावन के तो दस सिर थें, कम से कम वह दिखाई देता था तो श्रीराम भगवान ने मुकाबला किया था। मगर अभी जिस शैतान से सारी दुनियां लड़ रही है उसे लाखों सिर है जो दिखाई नहीं देते। वह हर वक्त अपना रूप बदता रहता है। ऐसे में यदि हम एक दूसरे की सहायता न करे तो क्या हम कोरोना को हरा पायेंगे। 


मैं जब भी खुद से नहीं हारा तो इस कोरोना वायरस की क्या औकात है |


एक-दूसरे का साथ दें, मास्क लगाकर रखें, उचित दूरी बनाकर रखें। तभी कोरोना को हरा पायेंगे। 


जय हिंद! जय भारत!

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8 सित॰ 2018

क्या सही और क्या गलत | Emotional Story | शिक्षाप्रद कहानी

क्या सही और क्या गलत, यह समझना आसान नहीं

कुछ समय पहले की बात है एक प्रोफेसर अपनी क्लास में कहानी सुना रहे थे, जोकि कुछ इस प्रकार है -

एक बार एक युवा दमपति जहाज में सफर कर रहे थे तभी जहाज के साथ एक घटना घटी। जहाज पानी में डूबने लगा। पूरे जहाज में अफरा तफरी मच गई। लोग एक एक करके जहाज से उतरने लगे। तभी युवा दमप्ति का भी उतरने का नम्बर आया। लेकिन समस्यां ये थी कि जैसे ही औरत उतरने वाली थी जहाज और तेजी से डूबने लगा। उसी समय इस घटना ने कुछ यू मोड़ लिया जो बहुत ही चौकाने वाला था। औरत ने अपने आदमी को जहाज से धक्का दे दिया। फिर जहाज डूबने लगी और औरत ने अपने आदमी से चिल्लकर कुछ कहा। 

इतना कहानी सुनाते ही प्रोफेसर ने रुककर अपने विद्यार्थियों से पूछा कि बताओ उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा। 

विद्यार्थी जीवन में बच्चों में प्रश्न का जवाब देने कि बहुत ही ललक होती है। कुछ विद्यार्थी तुरंत चिल्लाये और कहा कि स्त्री ने अपने पति से I hate you ! कहा होगा। 

सभी विद्यार्थी से प्रश्न का जवाब सुनते हुए प्रोफेसर ने बीच में देखा कि एक विद्यार्थी बहुत ही शांत बैठा है। प्रोफेसर ने उससे भी पूछा कि बताओ तुम्हारा जवाब क्या है। 

इस पर लड़के ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि औरत ने अपने पति को यह कहा होगा कि हमारे बच्चे का देखभाल करते रहना। 
यह सुनकर प्रोफेसर बहुत हैरान हुए और उन्होंने ने विद्यार्थी से कहा कि तुमने यह कहानी पहले सुन रखी है क्या ?

इस पर विद्यार्थी ने कहा कि जी नहीं सर, यह बात मेरी बीमार मरती हुई मां ने मेरे पिताजी से कही थी। प्रोफेसर ने फिर दुखपूर्वक लड़के से कहा कि तुम्हारा जवाब बिल्कुल सही है। 

इसके बाद प्रोफेसर ने इस कहानी को आगे सुनाया और कहा कि जहाज डूब गया और स्त्री पानी में डूबकर मर गई। उसका आदमी किसी तरह से किनारे पर पहुंचा और अपना पूरा जीवन अपने बच्चों को ठीक प्रकार से लालन पालन में लगा दिया। कई वर्षों बाद जब व्यक्ति की मृतु हुई तो एक दिन सफाई करते हुए उसकी एक पुत्री को अपने पिता की एक डायरी मिली। 

जब डायरी को उसकी लड़की ने पढ़ा तो उसे पता चला कि जिस समय उसके माता पिता जहाज में सफर कर रहे थे उस समय उसकी मां एक जानलेवा बिमारी से ग्रस्त थी और उसके जीवन के कुछ ही पल शेष रह गये थे। जहाज में बहुत ही अफरा तफरी का माहौल हो गया था और उस समय उसकी मां ने उसके पिता को कहा था कि मेरे जीवन के कुछ ही पल रह गये हैं और हमें अपने बच्चों का ललन पालन भी करना है और आप मुझे बचाने कि कौशिश करोगे तो हम दोनों ही मारे जायेंगे। इसलिए हमारे बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए आपको जीवित रहना होगा। आप किसी तरह से यहां से जाइयें और बच्चों का ख्याल रखना। 

ऐसे कठिन समय में लड़की के मां और पिता ने एक कड़ा निर्णय लिया। उसके पित ने डायरी में लिखा कि तुम्हारी मां बहुत ही निडर थी जिसने उसे अपनी मृतु के समय पर भी बचने का साहस दिया और मुझे बताया कि तुम्हारे बिना हमारे जीवन का कोई मतलब नहीं है। उस समय मेरा भी मन था कि तुम्हरी मां के साथ समंदर में समा जाऊ लेकिन मुझे तुम्हारे भविष्य के लिए जीना पडा क्योंकि तुम्हारी मां से मैने वादा किया था कि मैं तुम्हरा ख्याल रखूंगा। 

जब  प्रोफेसर ने अपनी कहानी समाप्त की तो पूरी क्लास में शांति का महौल हो गयाा था। 

Suvichar4u को पढ़ने और देखने वाले मेरे प्रिय साथियों हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि इस संसार में कई सही और गलत बाते हैं लेकिन इसके अतिरिक्त कई जटिलतायें भी है जिसको समझना बिल्कुल भी असान नहीं है। इसलिए किसी भी बातों कि गहराई को जाने बिना परिस्थिति का सही सही आकलन करना बिल्कुल भी असान नहीं है। 

हमें यह समझने चाहिए कि किसी भी प्रकार का कलह होने पर पहले जो माफी मांगे, यह जरुरी नहीं कि वह गलत ही हो। हो सकता है कि  रिश्ते को बनाये रखने के लिए उसने ऐसा किया हो। 

दोस्तों के साथ खाते-पीते या पार्टी करते समय जो दोस्त बिल चुका रहो हो, यह जरुरी नहीं कि उसका जेब नोटों से ठसाठस भरा हो। यह भी तो हो सकता है कि दोस्ती के सामने वह पैसों कि अहमियत को कम समझता हो। 

जो लोग आपकी सहायता करते हैं यह जरुरी नहीं कि वह आपके एहसानों के बोझ तले दबा हो। यह भी तो हो सकता है कि उसके दिल में आपके लिए दयालुता और करुणा कुट कुट कर भरा हो। 

आज के समय में जीवन इसलिए कठीन बन गया है क्योंकि हमने लोगों को ठीक से समझना छोड़ दिया हैं। थोड़ी सी समझ और थोड़ी सी मानवता हमे सही रास्ता दिखा सकती है। जीवन में कई एसे मोड़ आयेंगे जिसको ठीक प्रकार समझने के लिए ठीक प्रकार से विचार करने की जरुरत पडे़गी। 

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धन्यवाद!

30 अग॰ 2018

Motivational Story in Hindi | दिल को छूने वाली कहानी

दिल को छूने वाली कहानी

दूसरों को देने के लिए क्या है आपके पास

एक बार एक व्यक्ति ने एक घर खरीदा। उसमें फलों का बगीचा भी लगा हुआ था। उसके पडौस का घर पुराना था और उसमें बहुत सारे लोग रहते थे।

Motivational Story
एक दिन वह व्यक्ति अपने बगीचे में फूलों में पानी डाल रहा था तभी उसने देखा कि पडौस के घर से किसी ने बाल्टी भर कूड़ा उसके घर के दरवाजे पर डाल दिया। उसके बाद वह मन ही मन मुस्कुराया और उसके बाद शाम के समय में वह अपने पड़ौस के घर एक बाल्टी भर फल और फूल लेकर गया फिर दरवाजे की घंटी बजाई।

उस घर के व्यक्तों ने खिड़की से झाककर देखा और बेचैन होकर सोचने लगे कि कही वह लड़ाई करने तो नहीं आया है। लेकिन जैसे ही दरवाजा खोला और देखा कि रसीले ताजे फलों के साथ एक बाल्टी फल और फूल के साथ चेहरे पर मुस्कान लिए हुए उनका नया पडौसी सामने खड़ा है।

यह सब देखकर वे हैरान और परेशान हो गये। फिर उस व्यक्ति ने अंदर आने की इजाजत मांगी और कहा कि मैं आपके लिए ये सब लेकर आया हूं क्योंकि मेरे पास तो बस यही सब है। जो आपके पास था वह आपने दिया। पडौसी होने के नाते मेरा भी तो कुछ फर्ज बनता है। जो आपके पास था वो आपने दिया और जो मेरे पास है वह मैं दे रहा हूं। कृप्या इसे स्वीकार कीजिए।
धन्यवाद!

दोस्तों यह सच है कि जिसके पास जो कुछ होता है वह वहीं दूसरों को दे सकता है...
जरा सोचिए आपके पास क्या है दूसरों को देने के लिए.....

अगर यह कहानी आपको शिक्षाप्रद लगी हो तो इसे जनहीत के लिए शेयर कीजिए....धन्यवाद!

18 अग॰ 2018

Manushy Ka Svabhaav, Aaeena Se Kam Nahin

मनुष्य का स्वभाव, आईना से कम नहीं

किसी मनुष्य का उठना और बैठना या फिर उसका रहन-सहन या उसके बात करने का तरीका ,उसके बारे में सब कुछ बयान कर देता है। इसलिए कहा जाता है कि इन्सान का स्वभाव, आईना से कम नहीं कभी नहीं होता। 

मनुष्य चाहे कितना भी पढ़-लिख जाये या फिर कितना भी अमीर हो जाये लेकिन उसके बातचीत के स्वाभाव से उसके संस्कारों का पता लग ही जाता है। 

मनुष्य का स्वभाव, आईना से कम नहीं
इसलिए हमे अपने संस्कारों को कभी भी नहीं भुलना चाहिए। अपने संस्कार तथा स्वभाव पर ध्यान देना बहुत ही जरूरी है। कहते हैं न कि यदि बच्चों में अच्छे संस्कार और स्वभाव पैदा करना है तो उसके सामने हमें अपने अच्छे संस्कार तथा स्वभाव प्रस्तुत करते रहना चाहिए। किसी ने सही ही कहा है कि एक श्रेष्ठ बालक का निर्माण करना, सौ विद्यालयों का निर्माण करने से बेहतर होता है। 

आपने कई बार ऐसा देखा होगा कि कई व्यक्तियों कि आदतें उसके स्टेटस के बुल्कुल भी मेल नहीं खाता। 

इसी को ध्यान में रखते हुए मैं एक बहुत ही पुरानी कहानी प्रस्तुत करने जा रहा हूं। आशा करता हूं यह आपको बहुत ही पसंद आयेगी। 

बहुत पुराने समय की बात है, राजा के दरबार में एक अजनबी व्यक्ति नौकरी मांगने के लिए हाजिर हुआ। वहां पर उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई। इसके बाद उसने बताया कि मैं एक सियासी हूँ। इसके बाद राजा ने उसे घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज दे दिया और काम पर लगा दिया। कुछ दिनों बाद राजा ने उसे अपने सबसे अजीज घोड़े के बारे में पूछा तो उसने राजा को बताया कि घोड़ा नस्ली नहीं है। राजा को बहुत अदिख ताज्जुब हुई। उसने जंगल से घोड़े की जानकारी वाले को बुलाया। इसके बाद उसने बताय कि घोड़ा नस्ली नहीं है इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी और यह एक गाय का दूध पीकर उसके साध बड़ा हुआ है। फिर इसके बाद राजा ने उस सियासी को बुलाया और पूछा कि तुमको कैसे पता चला घोड़ा नस्ली नहीं है?

इसके बाद उने राजा को बताया कि यह गाय कि तरह सर को नीचे करके घास खाता है जबकि नस्ली घोड़ा घास को मुहं में रखकर सर को उपर उठा खाता है। इसके राजा बहुत खुश हुआ और उसे बहुत सारा इनाम दिया।   

इसके  साथ ही उसे रानी के महल में काम करने के लिए लगा दिया। कुछ दिने बाद राजा ने उससे रानी के बारे में राय मांगी तो उसे कहा कि तौर तरीके से रानी जैसे है लेकिन राजकुमारी नहीं। ऐसा सुनकर राजा के पैरों तले जमीन निकल गई और इसके बाद अपने सास को बुलाया और पूछताछ की तो पता चला कि उनकी बेटी जन्म लेने के 6 महीने बाद मर गई थी और इसके बाद उन्होने बच्चे को गोद लिया था जो आपकी रानी है। 

इसके बाद राजे ने सियासी से पूछा आपको कैसे पता चला ?

फिर सियासी ने कहा कि रानी का  आचरण नौकरों के साथ मूर्खों से भी बदतर है। एक खानदानी इन्सान का आचरण दूसरों के प्रति अच्छा होता है जो कि रानी में है नहीं। 

राजा एक बार फिर उससे बहुत खुश हुआ और बहुत से अनाज और भेड़ बकरिया उसके इनाम में दिया। कुछ दिन के बाद राजा ने सियासी को बुलाया और अपने बारे में पूछा तो उस पर सियासी ने कहा कि जान कि खैर हो तो मैं बताऊ। राजा ने वादा किया कि बताओ आपको कुछ नहीं होगा। फिर उसने राजा को कहा कि न तो आप राजा के पुत्र लगते हैं और न ही आपके अंदर राजा वाला गुण है। राजा को बहुत गुस्सा आया लेकिन उसने सियासी से वादा किया था इसलिए उसने उसे कुछ नहीं कहा। उसने अपनी मां को बुलाया पूछा। उसकी मां ने कहा कि हमारा औलाद नहीं था इसलिए हमने एक चरवाहे के बेटे को गोद लिया था जो कि तुम हो। फिर उसने सियासी से पूछा कि तुमको कैसे पता चाला तो उसने कहा कि राजा किसी को इनाम में हीरे मोती जवाहरात देता है न कि भेड़, बकरियां और खाने की चीज। इसलिए आपका चाल चलन चरवाहे के बेटे कि तरह है, किसी राजा की तरह नहीं। 

अतः इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किसी भी मनुष्य का आचरण उसके चरित्र को बता देता है। हमारी रहन-सहन और स्वभाव हमारे बारे में सब कुछ बताता है कि हम क्या है।

आपको मेरे यह आर्टिकल कैसा लगा, कमेंट करके बताये। यदि यह जानकारी आपको दूसरों के साथ शेयर करने लायक लगा हो तो इसे शेयर करें। 

धन्यवाद।।

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